अनवारी में गरजा बुलडोजर, 64 साल पुराना कब्जा मलबे में तब्दील,तालाब की जमीन पर बसी पूरी बस्ती उजड़ी, 36 अवैध मकानों पर चला प्रशासन का शिकंजा।

मो0 अलीम ब्यूरो रिपोर्ट 

बाराबंकी। शुक्रवार का दिन अनवारी कस्बे के लिए उस वक्त यादगार बन गया, जब सरकारी तालाब की जमीन पर दशकों से जमे अतिक्रमण के खिलाफ प्रशासन ने अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया। करीब 64 वर्षों से कब्जे में बताई जा रही भूमि पर बने 36 अवैध मकानों पर बुलडोजर गरजा और कुछ ही घंटों में पूरी तस्वीर बदल गई। जहां कल तक मकान खड़े थे, वहां अब मलबे के ढेर नजर आ रहे हैं।

अनवारी में गरजा बुलडोजर, 64 साल पुराना कब्जा मलबे में तब्दील,तालाब की जमीन पर बसी पूरी बस्ती उजड़ी, 36 अवैध मकानों पर चला प्रशासन का शिकंजा।

सुबह से ही कस्बे में प्रशासनिक अमले की हलचल शुरू हो गई थी। भारी पुलिस बल, राजस्व विभाग की टीम, चार जेसीबी और पोकलैंड मशीनों के साथ अधिकारी मौके पर पहुंचे तो इलाके में सनसनी फैल गई। देखते ही देखते मशीनों ने अवैध निर्माणों पर प्रहार शुरू कर दिया और वर्षों से खड़े मकान धराशायी होने लगे।

अनवारी में गरजा बुलडोजर, 64 साल पुराना कब्जा मलबे में तब्दील,तालाब की जमीन पर बसी पूरी बस्ती उजड़ी, 36 अवैध मकानों पर चला प्रशासन का शिकंजा।

कानून का बुलडोजर” चला, देखते रह गए कब्जेदार

प्रशासन की कार्रवाई इतनी व्यापक थी कि विरोध की कोई गुंजाइश नहीं बची। एक ओर बुलडोजर दीवारें गिरा रहे थे तो दूसरी ओर लोग अपने सामान को बचाने की जद्दोजहद में लगे थे। पूरे क्षेत्र में अफरा-तफरी जैसा माहौल दिखाई दिया।

अनवारी में गरजा बुलडोजर, 64 साल पुराना कब्जा मलबे में तब्दील,तालाब की जमीन पर बसी पूरी बस्ती उजड़ी, 36 अवैध मकानों पर चला प्रशासन का शिकंजा।

अधिकारियों का कहना है कि राजस्व अभिलेखों में दर्ज तालाब की जमीन को हर हाल में कब्जा मुक्त कराना प्रशासन की प्राथमिकता थी और न्यायालय के आदेश का पालन कराया गया है।

तालाब पर कब्जा कर बस गई थी पूरी आबादी

ग्राम अनवारी की गाटा संख्या 1056 सरकारी अभिलेखों में तालाब के रूप में दर्ज है। स्थानीय लोगों के अनुसार वर्ष 1962 की चकबंदी के बाद से इस भूमि पर धीरे-धीरे कब्जे होने लगे और समय के साथ यहां पूरी आबादी बस गई। पक्के मकान, चारदीवारियां और अन्य निर्माण खड़े कर लिए गए थे।

कोर्ट का आदेश बना अंतिम हथियार

मामला वर्ष 2022 में तहसीलदार न्यायालय पहुंचा था, जहां धारा-67 के तहत बेदखली के आदेश जारी किए गए। कई बार नोटिस देने के बावजूद कब्जा नहीं हटाया गया। आखिरकार प्रशासन ने सख्त रुख अपनाते हुए बुलडोजर कार्रवाई का फैसला लिया।

हाईवे पर थम गए पहिए

कार्रवाई के दौरान लखनऊ-महमूदाबाद हाईवे पर लोगों की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। तमाशबीनों और वाहनों की वजह से एक किलोमीटर से अधिक लंबा जाम लग गया। सड़क पर घंटों तक रेंगते वाहनों का सिलसिला चलता रहा, जबकि पुलिस व्यवस्था संभालने में जुटी रही।

पूरे इलाके में मचा हड़कंप

अनवारी में चली इस कार्रवाई के बाद सरकारी भूमि पर कब्जा जमाए बैठे अन्य लोगों में भी खलबली मच गई है। प्रशासन की इस सख्ती को आने वाले दिनों में और बड़े अभियान का संकेत माना जा रहा है।

“64 साल से खड़ा कब्जे का साम्राज्य शुक्रवार को कुछ घंटों में ढह गया। अनवारी में चला बुलडोजर सिर्फ दीवारें नहीं गिरा रहा था, बल्कि सरकारी जमीन पर अवैध कब्जों के खिलाफ प्रशासन का कड़ा संदेश भी दे रहा था।

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